Wednesday, 21 August 2019

Lakme Fashion Week

केवीआईसी, लक्मे फैशन वीक विंटर / फेस्टिव 2019 में महात्मा गांधी के 150 साल पूरे होने का जश्न मनाएगा

भारतीय वस्त्र विरासत का प्रतीक, खादी को हाथ से कते होने, हाथ से बुने तथा सही मायने में धारण करने योग्य होने की अपनी विशिष्टता के कारण खादी का वर्षों से अहम स्थान रहा है । महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मनाने और भारतीय स्वतंत्रता के इस वस्त्र का जश्न मनाने के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने हाथ से कते और हाथ से बुने हुए रेशम व खादी वस्त्रों के विशेष संग्रह तथा उनके प्रदर्शन के लिए  लैक्मे फ़ैशन वीक-विंटर / फेस्टिव 2019 के दूसरे दिन 3 युवा डिजाइनरों-गौरव खानीजो, अनुज भूटानी तथा  पल्लवी भयानी के साथ सहयोग लेना सुनिश्चित किया है ।

इस सहभागी के तौर पर तीनों डिजाइनरों को खादी और ग्रामोद्योग आयोग के माध्यम से कारीगरों के साथ जुड़ने और आसानी से उपलब्ध परिधान संग्रह बनाने का अवसर मिलेगा, जो देश भर के चुनिंदा केवीआईसी के खादी इण्डिया स्टोर्स में उपलब्ध होगा।

डिजाइनर अनुज भूटानी पुरुषों और महिलाओं के लिए एक संग्रह का प्रदर्शन करेंगे जो कि कपड़े की समन्वेषण, वस्त्र तथा इसकी स्थिरता पर ध्यान देने के साथ ’आरामदायक विशिष्ट वस्त्र’ प्रदान करता है। लेबल “खानिजो” के डिजाइनर गौरव खानीजो, एक संग्रह पेश करेंगे जो हमारे भविष्य के परिधानों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है एवं ‘लेबल थ्री’ की डिजाइनर पल्लवी ध्यानी को सिल्हूट दिखाते हुए देखा जा सकेगा जो आधुनिक, न्यूनतम और उपयोगिता वाले हैं। यह रेंज लेबल को पहली बार मेन्सवियर संग्रह में रखा जाएगा ।

केवीआईसी के अध्यक्ष श्री विनय कुमार सक्सेना ने पहले ही कई अवसरों पर कहा है कि “खादी भविष्य का वस्त्र है । अपने अनूठे इको-फ्रेंडली स्वभाव और परिपूर्ण तथा शोख रंग युक्त वस्त्र गुणों के कारण खादी एक स्टाइलिश रिवायत बन गई है जो अब डिजाइनरों द्वारा लोकप्रिय रूप से आत्मसात की जा रही है । लंबी और कठिन लड़ाई के बाद मिली स्वतन्त्रता के लिए  खादी का उपयोग भारतीयता की पहचान के लिए एक उपकरण के रूप उपयोग में किया गया । पिछले 72 वर्षों से लेकर अब तक खादी वस्त्र सभी अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के पार भी रचनात्मक सोच को प्रेरित और अचंभित करता है । “फैब्रिक ऑफ़ इंडिया” के नाम से जानी जाने वाली, खादी अपने आप में एक संस्कृति साबित हुई है, जो सही मायने में हमारे देश की उपलब्धियों का गौरव बनती है।
खादी में नवाचार अब व्यापक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं । युवा और प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर खादी में नवाचार कर रहे हैं और खादी के प्रति आकर्षण को एक नया मोड़ दे रहे हैं। वस्त्र में नए रंगों का चयन एवं विस्तार, कटिंग,  सिलाई के तरीकों में पश्चिमीकरण को शामिल करना, और अपने आप में नए रुझानों का निर्माण करना, खादी वस्त्र ने भविष्य में पहने जाने वाले परिधानों के रूप में खुद को ढाल लिया है। ”

सहभागिता पर टिप्पणी करते हुए आईएमजी रिलायंस के फैशन के प्रमुख और उपाध्यक्ष श्री  जसप्रीत चंडोक ने कहा कि महात्मा गांधी की जयंती के 150 वर्ष  पूरे होने पर जश्न मनाने के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग के साथ एक बार फिर से साथ आना हमारे लिए गौरव की बात है । खादी और ग्रामोद्योग आयोग द्वारा डिजाइनर खनीजो, अनुज भूटानी और पल्लवी ध्यानी के साथ मिलकर अपना अनूठा संग्रह प्रदर्शित करने पर हमें गौरव की अनुभूति हो रही है जो बड़े पैमाने पर उपभोक्ताओं द्वारा उनकी जीवन शैली मे शामिल होने के लिए तैयार है।

खादी और ग्रामोद्योग आयोग, खादी, ग्रामोद्योग तथा हस्तनिर्मित उत्पादों के लिए भारत का सबसे बड़ा मंच है जिसे अप्रैल 1957 में भारत सरकार के अधीन गठित किया गया था। यह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत ग्रामीण विकास के लिए जहाँ भी आवश्यक हो ग्रामीण विकास में लगी अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय कर खादी और ग्रामोद्योग की स्थापना, विकास योजना, प्रचार, सुविधा, प्रायोजन तथा अन्य सहायता के लिए स्थापित एक सांविधिक निकाय व सर्वोच्च संगठन है ।

लक्मे फैशन वीक-विंटर / फेस्टिवल 2019, का आयोजन 21 से 25 अगस्त 2019 तक होगा।

Jewelery exhibition opens in Mumbai



13th Edition of IIFJAS inaugurated in Mumbai by Ms. Amruta Fadnavis

The India International Fashion Jewellery & Accessories Show {IIFJAS} is oldest, largest and official platform in India for the Fashion & Imitation Jewelry. Fondly known as the Face of Indian fashion Jewelry Industry, IIFJAS is all set to welcome everyone to witness a larger and enhanced show at the 13th edition in Mumbai from 20th to 23rd August, 2019 at Bombay Exhibition Centre(NESCO) Goregaon from 10:30 am onwards to 6:00 pm. The exhibition was inaugurated by Ms. Amruta Fadnavis (banker, singer and social activist) she not only graced the show rather personally visited various stalls to check out new trend and options available.

IIFJAS is a platform which gives chance to all the upcoming jewelry designers and manufacturers of India, fashion stylists, renowned buying houses and buying agents, Television production houses and many top-notch merchandising outlets, aside from wholesalers, retailers, traders, importers and exporters to showcase the unique portion of their work.

Ms. Amruta Fadnavis who is a versatile personality and wears many feathers in her cap like that of a social activist, banker and singer, is also known for her fashion and style statement, when asked about her experience she said ""It was an exhilarating experience to see these many latest trends and designs from different parts of India as well as the world under one roof in IIFJAS 2019. I am glad that I visited here”.”

“We're thrilled to start next edition of IIFJAS which has developed into the premiere destination for individuals and brands from fashion jewelry industry to showcase their strengths and talents," said  Devraj Semlani, Chairman, Radiaant Expositions Ltd.

“With changing trends people’s preference for jewelry has also changed which led to a rise in growth of fashion jewelry Industry. Through IIFJAS we strive to provide a platform to the industry and give them their due share in the market” said Abhishek Jaiin- Director- Radiaant Expositions Ltd.

It is the only show that boasts of being the individual destination in India to see the modern trends and inventions of leading brands & manufacturers in costume jewellery, CZ Jewellery, fashion jewellery, silver jewellery, raw materials, pieces of machinery, packaging & accessories products from Gems & Jewellery industry.

The Thirteenth Edition is expected to be more magnificent than ever and facilitate grander business opportunities to about 250+ suppliers spread across 350+ stalls and 10,000+ quality trade buyers from all across the globe. The buyer-turnout is expected to be a record breaking one, with buyers joining-in from 250+ Indian cities from over 20 Indian states, and internationally from all 7 continents of the world, specifically from countries and regions like USA, UK, Australia, Spain, Brazil, Nigeria, S. Africa, Turkey, Tunisia, Singapore, Nepal, Canada, Mexico, Cyprus, Myanmar, China, Bahrain, Dubai, Jeddah, Japan, Afghanistan, Bangkok, Sri Lanka, Bangladesh, UAE, Nigeria and Hong Kong, showing great appreciation for the trend-setting designs and quality products to be displayed at the IIFJAS.

IIFJAS attracts fashion and style connoisseurs from different parts of world. Footfall includes people like  Jewelry designers, fashion designers, fashion stylists, renowned buying houses and buying agents, Television production houses and many top-notch retail outlets, apart from wholesalers, retailers, traders, importers and exporters.

IIFJAS affirms its crystal clear vision to benefit the entire industry and motivate other related sections to join the business league in the coming years, by acting as the perfect platform for sourcing costume & fashion jewelry and accessories.

Sye Raa Narasimha Reddy 's teaser released


Chiranjeevi is upbeat about his upcoming flick, Sye Raa Narasimha Reddy, a period flick, based on Telugu freedom fighter Uyyalawada Narasimha Reddy. Directed by Surender Reddy, the big-budget flick stars an ensemble cast including Chiranjeevi, Nayanthara, Tamannaah, Amitabh Bachchan, Vijay Sethupathi, Kichcha Sudeep and Vijay Sethupathi in pivotal roles.

The teaser launch of Sye Raa Narasimha Reddy took place in a grand manner in Mumbai today (August 20). At the event, Chiranjeevi was asked to speak about Amitabh Bachchan, who plays a brief yet important role in Sye Raa Narasimha Reddy. Produced by Ram Charan, the film will be jointly distributed in Hindi by Farhan Akhtar and Ritesh Sidhwani. Sye Raa Narasimha Reddy will release on October 2.

Vidya Balan - Knotty at forty


विदया बालन नॉटी ऍट फॉर्टी

-हर्षदा वेदपाठक

बेगम जान या चित्रपटानंतर विदया बालन, मिशन मंगल या चित्रपटामध्ये अनेक अभिनेत्रींबरोबर काम करतेय. सहअभिनेत्री या सगळ्या महिला असल्या की. सेटवर कपडे, साड्या, फॅशन, जेवण याविषयीच भरपुर चर्चा व्हायची. हे सांगताना, विदया स्पेस या  वेगळ्या विषयावर काम करायला मिळाले यावर समाधान व्यक्त करते. यासह तिच्याबरोबर केलेली बातचित.

मिशन मंगलच्या निमीत्ताने बोलायचे तर तु बारा वर्षानंतर अक्षय कुमार बरोबर काम करत आहेस ?

हे बेबी आणि भुल भुलैय्या हे दोन चित्रपट आम्ही लागोलाग केले होतेत. बारा वर्षाचा कालावधी कधी लोटला तेच समजले नाही. सेटवर सुरवातीला तो ज्या प्रकारे मस्ती करायचा, त्याच प्रकारे अजून देखिल वावरताना दिसला.

आयुष्याची सुरवात वयाच्या चाळीशीमध्ये होते असं म्हणतात. त्या प्रचलीत वाक्य प्रचाराबरोबर तु कश्या प्रकारे जुळवुन घेतेस ?

ओह याह, टेल मी अबाउट इट...मी, माझ्याबरोबर कधी नव्हे, इतकी खुश आहे. मला वाटतं, स्वताबरोबर समाधानी असणे, हेच मुळी वाढत्या वयाबरोबर किंबहुदा आयुष्यात आलेल्या अऩुभवामुळे येणारया मॅच्युरीटीमुळे शक्य होते. आहे त्या परिस्थीतीमध्ये तुम्ही स्वताचा स्विकार करता. आणि स्वताला समजण्याचा जो प्रयत्न करता, तो याच वयात सुरु होतो. अगदी लहानसहान गोष्टी मधुन तुम्ही समाधान मिळवत राहता. 

चाळीशीमध्ये भेडसावणारया मिडलाईफ क्रायसेसचे काय करायचे ?

मिडलाईफ क्रायसेसचा प्रश्न बायकांना काहीच भेडसावत नाही. तर तो पुरुषांना  त्रासदायक ठरतो. बायकांचे प्रॉब्लेम हे मेनोपॉजमुळे होतात. त्या खेरीज स्रीयांना दर महिन्याला मासिक पाळी दरम्यान जो त्रास होतो, तेवढाच ऐक प्रश्न असतो. मला वाटतं स्रीयां मेनोपॉझमध्ये आहेत, या विषयाला त्या सहन करु शकत नाही. कारण त्यामागे आपण एक स्त्री आहोत आणि ते स्रीत्व आता उरलेलं नाही, हा विचार त्यांना विखारी वाटत असावा. बरं मेनोपॉझ बरोबर येणारं चिडचिडेपण, भय, मनात राहुन जाणारी चिंता या गोष्टींचा महिलांना फार त्रास होतो. आणि हे सगळ्या महिलांबरोबर घडते.
आणखीन एक महत्वाची गोष्ट म्हणजे, माझी मावशी जेव्हा मेनोपॉझच्या संक्रमणातुन जात होती. तेव्हा ते आम्हाला काय किंवा घरात कोणालात कसे ते काय कऴले नाही. आता मात्र अनेक स्रीया त्यावर व्यक्त होताना दिसत आहेत. आणि ते बदललेल्या काळाचे प्रतिकच मानले पाहिजे.

पुरुष चाळीशीचा झाला की, नॉटी होतो असे म्हणतात मग बायकांबरोबर तसे का नाही घडत ?

माझा एक मित्र आहे ज्याने  लग्न केलेले नाही. आणि त्याला जिवनामध्ये ऐका स्रीबरोबर रहायचे नाही, यावर तो ठाम आहे. तर त्याच्या जिवनात अऩेक स्रीया आहेत. तो कमीटमेन्ट फोबीक असुन, त्याला लॉग टर्म रिलेशनशिपमध्ये राहायचेच नाही. असे त्याचे म्हणणे आहे. तो मला सांगत होता, पस्तीशीच्या पुढील स्रीया या खुप (हसुन) तेज तर्रार असतात.  मला वाटतं तो पर्यत स्रीयांना, अन्डर द शिट चा बरयापैकी अनुभव असतो. त्यामुळे पुरुषांना त्या हुक करु शकतात, यात वाईल्डपणा आणि नॉटीनेस आहेच की.

तु काय नॉटी केलं आहेस ?

(खळखळुन हसून) ते सांगण्यासारखे असते तर नक्कीच तुम्हा सगळ्यांना सांगीतले असते.

फक्त तुझ्याबद्दल तु गर्भवती असल्याच्या अनेक चर्चा बरयाचदा ऐैकाला येतात काय सांगशिल त्याबद्दल ?

सब उल्लु के पठ्ठे रहे है....मी कधीच बारीक, शिडशिडीत अशी नव्हती. आणि तुम्हाला माझे पोट दिसुन आले तर समजा मी आयुष्यभर मग (हसून) गर्भवती आहे.

एक काळ असा होती की, कलाकार अभिनयावर लक्ष देत होतेत. आता मात्र चर्चा होते ती, झीरो फिगरची ?

मुलींनी नेहमी तरुणच राहीले पाहिजे असा, समाजामध्ये एक प्रघात आहे. आणि त्यामुळेच ते चित्रपटाबरोबर जोडलं गलं आहे. ज्यामुळे तुम्ही पुरुषांच्या नजरेत आकृष्ट राहु शकता. स्री तरुण नसली तर पुरुष आपोआपच, तिच्यापासून दुर जाऊ लागतात आणि ते वास्तव आहे .याच कारणामुळे प्राचीन काळी राजा अनेक राण्या करत, आणि नविन राणी हि आधिच्या राणीपेक्षा नक्कीच तरुण असायची. त्याकाळी बायकींची लग्ने लवकर होत असत. मग मुले, यात स्री पार दमुन जात असे.  आता मात्र बदलेल्या काळानुरुप, स्रीयांचे शिक्षण, मग नोकरी आणि लग्न या यात उशीर होत आहे. त्यामुळे स्रीयांच्या आयुष्याची खरी  सुरवात हि  पस्तीशीमध्ये होते असे म्हटले तरी वावगे ठरणार नाही. इतकच नाही तर मुलांना कधी जन्माला घालायचे हे पण ती आता ठरवु लागली आहे. माझ्याबद्दल बोलायचे तर मी झीरो फिगर या श्रेणीत कधीच बसली नाही कारण मी कधीच शिडशीडीत नव्हते.  माझ्या शरीराबद्दल लोकं काय बोलतात, त्याची पर्वा करणे मी सोडले आहे. पण माझा लुक आणि शरीर याने मी किती खूश आहे ते तु्म्हाला सांगू शकत नाही.  आय फिल सॅक्सी ऑल द टाईम...

तुझ्या लेखी सुंदरतेची व्याख्या काय ?

मला वाटंत तुम्हाला घरात ज्या प्रकारे वाढवलं जातं त्यावरुन तुमची सुंदरतेची व्याख्या ठरते. आमच्या घरात मला सुंदर मुलगी म्हणुनच वागवले गेले. तुम्ही शाळेत जाता, तेथे किंवा तुमचे मित्र मैत्रीणी तुम्हाला तुमचे नाक, दात. केसं, जाडेपणा या वरुन चिडवू लागतात. आणि तेथे सुंदरता म्हणजे काय याची तोंडओळख होते. दुसरी महत्वाची गोष्ट म्हणजे, तुमचे आईवडील तुम्हाला ज्याप्रकारे पाहतात. त्यांच्या नजरेतुन तुम्ही, स्वताला पाहत असता. तेथे तुमच्या सुंदरता या व्याख्येचे पहिल्यांदा विशेषण झालेलं तुम्हाला पहायला मिळते. अमेरिकन ब्युटी नावचा मी एक चित्रपट पाहिला होता, त्यात ऐक संवाद होता – सुंदरता चेहरयाने येत नाही तरी तुम्ही आयुष्यात काय काम करता त्याने ठरवली जाते. आणि माझे विचार त्या वाक्याबरोबर जुळतात. महत्वाची गोष्ट म्हणजे, विदयाला तुम्ही जे पडदयावर पाहता, ते एक पात्र म्हणून ,तेथे ती ऐक अभिनेत्री असते. भुमिका आणि विदया या दोन वेगळ्या गोष्टी आहेत. 

चित्रपटसृष्टीमध्ये आता अभिनेत्रींना वेगवेगळ्या भुमिका मिळू लागल्या आहेत. मग तिचे वय, तिचे झालेले लग्न यावर पूर्वी ऐवढी चर्चा  आता होताना दिसत नाही?

अश्याप्रकारचा बदल नक्कीच स्वागतार्त आहे. आणि त्यांनी तसा बदल नाही केला, तर मी त्यांना तो बदल करायला भाग पाडेन. दहा वर्षापासुन मी स्त्री सत्ताक भुमिका करत आहे. तेव्हा मला  वाटायचे की अश्याप्रकारचे चित्रपट चालणार नाहीत. मी केलेल्या चित्रपटांपैकी, काही चित्रपट खुप चाललेत, काही कमी चाललेत तर काही अजीबात चालले नाहीत. मी मात्र चित्रपट स्विकारताना कसलाच विचार करत नाही. माझा चित्रपटसृष्ट्तील प्रवेशच मुळी वयाच्या पंचवीशी नंतर झाला. जेव्हा अनेक अभिनेत्री रीटायर्ड होतात,काहींची लग्न होतात. आपण आपल्या आसपास पाहिले तर दिसुन येईल की, लग्न झालेल्या कोणाचेही जिवन थांबले नाही. आता तसच काहीसं चित्रपटसृष्ट्रीबद्दल घडू लागले आहे. मला वाटतं, जो पर्यत तुम्हाला, एक व्यक्ती, एक स्त्री म्हणून तुमच्यामध्ये रस असेल, आत्मविश्वास असेल तरच तुम्ही समोरच्या माणसाला तुमच्या कलाकृतीने बांधून ठेवू शकता असे मला वाटते.  मला आयुष्यभर अभिनय करायचा आहे, त्यामुळे जी भुमिका माझ्या  हदयायाल भिडेल तिच मी स्विकारेन. आणि मला खात्री आहे, त्या भुमिका प्रेक्षकांना खिऴवुन ठेवण्यात पण यशस्वी ठरतील. 
मला लोकं सांगत होतीत की, माझे अनेक चित्रपट चालले आहेत. आणि ते माझ्या एकटिच्या जोरावर चालले आहेत, हे हि ते सांगतात. मग मला ही माझ्या हातामध्ये अंबुजा सिमेन्टीची पॉवर आली आहे असे वाटु लागले. आणि त्यानंतर मात्र माझे काही चित्रपट लागोलाग आदळलेत असे देखिल होऊ शकते. 

अनेक अभिनेत्रीबद्दल अऩेकदा मोठमोठी गॉसीप आणि कॉन्ट्रोव्हसी  ऐैकू येतात. पण तुझ्याबद्दल तसं कधी ऐैकू नाही आलं. या सगळ्यापासुन तु कशी काय लांब राहीलीस ?

लग्नापुर्वी काही लगानसहान गोष्टी माझ्याबद्दलही चर्चेत येत होत्यात. मात्र लग्न झाल्यावर सगळच थांबलं. सेटवर मी पुर्वीपण मजा करायची, आणि आता देखिल मजा करते. अक्षय मला नेहमी सांगतो, तु मुलासारखी वागतेस . मी पण स्वताला काही छुईमुई समजत नाही. म्हणून कादाचित गॉसिप माझ्यापसून लांब राहीले असावे .

वेब फिल्म या नविन प्लॅटफॉर्मवर तुला काम करताना पाहता येणार काय ?

दोन वर्षापुर्वी मी ऐका पुस्तकाचे हक्क विकत घेतले आहेत ते वेब सिरीजसाठीच. अजुनही त्यावर काम सुरु आहे. पुढचे अजुन ठरायचे आहे.


-हर्षदा वेदपाठक



John Abraham on Batla House


जॉन आब्राहम - वास्तवदर्शी विषयाचे दास्ताऐवजीकरण व्हायला पाहिजे
- हर्षदा वेदपाठक

विकी डोनर, परमाणु, मद्रास कॅफे या चित्रपटांनतर जॉन अब्राहम निर्माता म्हणून  बाटला हाऊस या चित्रपटासह तयार आहे. दिल्ली हायकोतर्टाने बंदी उठवल्यानंतर, उदया तो चित्रपट भारतभर प्रदर्शित होत आहे. यासह जॉन बरोबर केलेली बातचित,

दिल्ली हायकोर्टाने बाटला हाऊस वरील बंदी उठवली आहे. त्यामुळे चित्रपट प्रदर्शित झाला काय सांगशिल त्याबद्दल?

बाटला हाऊसमध्ये आरोपी असलेल्या दोन गुन्हेगारांनी, या चित्रपटावर बंदी आणावी यासाठी कोर्टात याचिका दाखल केली होती. परंतु, आम्ही या चित्रपटाची कथा हि सार्वजनिक असलेल्या माहितीवर आधारीत असल्याचे पुरावे दिले. त्यात कोणत्याही घटनेला खोटे दाखवले गेले नाही, किंवा कोणत्याही घटनेचे उदात्तीकरण केलेले ऩसल्याचे आम्ही सिध्द केले. त्याखेरीज लहान मुले बॉम्ब तयार करत आहेत, तिच मुले कुराणचा वास्ता देत चर्चा करत राहतात या दोन दृष्यांना आम्ही टोन डाऊन केलं आहे. कोर्टाने, सोमवारी चित्रपट पाहिला आणि मंगळवारी त्यावर दिवसभर चर्चा करुन काल प्रदर्शित करायची ऑर्डर काढली. आता बाटला हाऊस, ठरवलेल्या तारखेनुसार प्रदर्शित होत आहे. 

बाटला हाऊस सारख्या वास्तववादी भुमिकांसाठी जेंव्हा दिग्दर्शकांकडून विचारणा होते, तेंव्हा नेमकं कसं वाटतं?

नक्कीच चांगलं वाटतं. काही असे विशिष्ट कलाकार आहेत, ज्यांचं त्यांच्या देशावर प्रेम आहे आणि ते त्यांच्या चेहऱ्यावरुन आणि देहबोलीतूनही दिसून येतं. माझं माझ्या देशावर असलेलं प्रेम अगदी स्पष्ट आहे आणि मुख्य म्हणजे संजीव कुमार यादव या व्यक्तिरेखेसाठी माझी शरिरयष्टी अगदी चपखल आहे. निखिलने मला ही पटकथा एकदा तरी वाचून पहाच, असा आग्रह केला आणि जेंव्हा मी ती वाचली तेंव्हा मी थक्क झालो. सत्य हे कल्पनेपेक्षाही चमत्कारीत असते. मला सुरुवातीला वाटलं की हे काल्पनिक आहे, पण त्यातील प्रत्येक गोष्ट खरी आहे. आणि त्या चित्रपटाची निर्मीती देखिल केली.

घटना आणि भुमिका दोन्ही वास्तवदर्शी आहेत. कश्याप्रकारे भुमिकेची तयारी केली?

तुम्ही जेव्हा वास्तविक पात्र साकारत असता, तेंव्हा तुम्ही सर्जनशील स्वातंत्र्य घेऊ शकता, पण त्यासाठी  मर्यादा निश्चित करणे आवश्यक असते. आणि मी संजीव कुमार यादव यांच्याबरोबर ऐक दिवस घालवण्याचा निर्णय घेतला. पहिल्या दिवशी मी त्यांच्याबरोबर सहा तास होतो आणि त्या दरम्यान त्यांच्या मनात काय सुरु आहे याची अंतर्गत प्रक्रिया समजून घेण्याचा मी प्रयत्न केला. बंदूक वापरायला शिकलो. बाबरी मशीद प्रकरणानंतरचे हे वादग्रस्त प्रकरण होते आणि हा विषय आम्ही कसा हातळणार आहोत, हे खूपच महत्वाचे होते. त्यांना पीपीएसटी पोस्ट ट्रॉमॅटीक समस्या होती. त्यांची पत्नी त्यांना सोडून जाऊ इच्छित होती आणि त्याचबरोबर काही कौटुंबिक समस्याही होत्या. त्यांना आत्महत्या करावीशी वाटत होती आणि भारत सरकारकडून त्यांची चौकशी सुरु होती. (आतापर्यंत)त्यांनी नऊ शौर्य पुरस्कार मिळवले आहेत. घटनेपुर्व त्यांना(यापैकी) सहा शौर्य पुरस्कारांनी गौरवण्यात आले होते. या सगळ्या गोष्टींचे संतुलन राखणे आवश्यक होते आणि आम्ही बरयापैकी तसा प्रयत्न केला आहे.


निखिलला आणि तुला बाटला हाऊस हा विषय का आकर्षक वाटला?

निखील अडवाणी दिग्दर्शित डी-डे हा चित्रपट मला खुप आवडला होता. मात्र बाटला हाऊस हा चित्रपट त्याच  दृष्टीकोणातून बनवता येणार नाही, यावर आमचं दोघांचं एकमत होतं. पिडीतांचा दृष्टीकोन, दहशतवाद्यांचा दृष्टीकोन आणि आम्ही त्यांची कशी व्याख्या करतो ते, दिल्ली पोलिस, साक्षीदारांचा दृष्टीकोन आणि चौथा न्यायालयाचा दृष्टीकोन... हे सगळे ऍंगल आणि चर्चा महत्वाची होती. आहे. आणि मला वाटतं प्रेक्षकांना ती नक्कीच आवडेल.   

अरिझ खानचे काय?

या प्रकरणावर सध्या न्यायालयीन सुनावणी सुरु आहे. त्यामुळे मला त्यावर भाष्य करण्याची परवानगी नाही. बाटला हाऊस ही एका वास्तव घटनेपासून प्रेरीत अशी काल्पनिक कथा आहे. तसा आम्ही डिस्क्लेमरही दिला आहे. आमच्याकडे सीबीएफसीचे यु/ए प्रमाणपत्र आहे, त्यामुळे या विषयावरील मत मी राखून ठेवले आहे.

बाटला हाऊस हा विषय वादातीत आहे. त्यावर चित्रपट तयार करताना भिती नाही वाटली तुला ?

चित्रपटात सगळ्या दृष्टीकोनांतून भाष्य करण्यात आले आहे आणि आम्ही ते प्रेक्षकांवर सोपवले आहे. कलाकार आणि दिग्दर्शक म्हणून तुम्हाला तुमचे राजकीय पक्षपात बाजूला ठेवावे लागतात आणि प्रेक्षकांसमोर निःपक्षपाती दृष्टीकोन मांडावा लागतो. आणि आम्ही ते काम केलं आहे.

सत्यघटनांचे दस्तऐवजीकरण आपल्याकडे फारसे होत नाही. त्यामुळे की काय वास्तवदर्शी चित्रपट ही आपल्याकडे फारसे होत नाहीत?

कोणालातरी ते काम करावे लागणारच. आणि ते मी परमाणुच्या वेळी केले. मद्रास कॅफे या चित्रपटाच्या शेवटी पण तसेच झाले. चित्रपट पाहून लोकं म्हणाले की तो ऑफीसर शेवटी मारला गेला आणि जॉन अब्राहमने त्याला वाचवले नाही. देशाच्या तरुणाईला राजीव गांधींच्या हत्येविषयी माहिती नाही. पन्नास तरुणांपैकी एक जण फक्त म्हणाला की तो चित्रपट राजीव गांधींशी संबंधित आहे. ही देशाची आजची परिस्थिती आहे. जेएफकेकडे पाहिलं तर समजतं की विदेशी लोकांनी  कशाप्रकारे सत्यघटनांचे दस्तऐवजीकरण केले आहे. पण त्याचबरोबर ते अतिशय रंजकही बनवलं आहे. कोणीतरी अशा गोष्टी सांगितल्याच पाहिजेत आणि मी ते करत असल्याचा मला आनंद आहे.

निर्मात्याच्या भूमिकेत शिरावं असं का वाटलं ?

मी निर्माता झालो कारण एक अभिनेता म्हणून मला माझ्या आवडीचे चित्रपट करायला मिळत नव्हते. निर्माता झाल्यावर एक अभिनेता म्हणूनही माझ्यात सुधारणा झाली. कोणीतरी आजचा, वेगळा विषय असलेला सिनेमा करायला हवा. विक्की डोनरने बधाई हो बधाई, शुभमंगल सावधान, उरी, आर्टीकल 15, खानदानी शफाखाना या सारख्या चित्रपटांना जन्म दिला. तुम्ही ट्रेंड सेटर असायला हवं असं मला वाटते आणि मला काही तरी वेगळं करायचं होतं.

व्यावसायिकदृष्ट्या यशस्वी चित्रपट तयार करताना तुम्हाला तडजोड करणं भाग असतं का?

मला तरी तडजोड करावी लागते, कारण मी छोट्या बजेटचे चित्रपट करत असतो. माझ्याकडे मोठ्या आणि आलिशान सेटस् ची चैन नाही. बाटला हाऊस करत असताना सेटलाईट हक्क, संगीत, डीजीटल यासह चित्रपटाचा बाकी खर्च वगळून आम्ही चित्रपट भारतभर प्रदर्शित करु शकलो. शंभरापैकी, पन्नास रुपये वितरकाकडे जातात. वितरण साखळीत प्रत्येक जण सुरक्षित आहे. मुख्य म्हणजे, एक चांगले कथानक तुम्हाला सर्वोत्तम प्रकारे सांगण्यासाठी मी माझ्या डोक्याचा वापर करण्याचा प्रयत्न करतो.

तुझ्या चित्रपटातील नायिकांच्या निवडीबाबत काय सांगशील?

तेमी दिग्दर्शकांवर सोपवतो. परमाणुमध्ये माझ्याबरोबर अनुजा साठे आणि मृणाल पांडे होत्या. दोघीही अतिशय उत्कृष्ठ आणि शिस्तशीर अभिनेत्री होत्या. मी त्याबाबत कुठलाही निर्णय घेत नाही. अगदी नोहा फतेहीला एका गाण्यासाठी घेण्यात आल्याचंही मला माहित नव्हतं. अभिनेता आणि अभिनेत्री यांच्यामधिल केमस्ट्री चांगली असली पाहीजे, पण याबाबतचा निर्णय माझा नसतो. तो दिग्दर्शकाचा निर्णय असतो.

तुझी अक्षयबरोबर तुलना केली जाते, त्यावर काय सांगशील?

आमची मानसिकता मिळतीजुळती आहे आणि आम्हाला देशभक्तीपर चित्रपट करायला आवडतं. मला वाटतं, जर पटकथा चांगली असेल, तर तुम्ही असे चित्रपट करावेत. अक्षय चांगले चित्रपट करत आहे आणि मी मला करावेसे वाटतात ते चित्रपट करतोय, जे खूपच छान आहे. ही चांगली गोष्ट आहे. तुम्ही असे चित्रपट करु शकत नाही जे देशभक्तीपर आहेत पण आशयघन नाहीत, असे चित्रपट चालणार देखिल नाहीत. तुम्ही बघाल की काही मोठ्या बजेटचे चित्रपटही साफ आपटले आहेत. त्यामुळे आशय महत्वाचा आहे. मला देशभक्त व्हायला आवडेल पण मला राष्ट्रवादी बनायचे नाही. देशाच्या सद्गुणांमुळे देशभक्त देशावर प्रेम करेल. राष्ट्रवादी देशातील सगळ्यासाठीच देशावर प्रेम करेल. मला देशाबाबत चिकित्सक व्हायचं आहे, तरीही देशावर माझे प्रेम आहेच.

स्वातंत्र्यदिनाच्या काही आठवणी आहेत का?

लहान असताना मला ध्वज धरायची खूप इच्छा होती, पण त्यावेळी त्याची परवानगी नव्हती. पण मला आठवतं, त्यावेळी लवकर उठून झेंडावंदनाला मी जात असे. पण माझ्यासाठी सगळ्यात आनंदाचा भाग म्हणजे फुटबॉल खेळायला जाणे, कारण तो सुट्टीचा दिवस असायचा.

बाटला हाऊस या चित्रपटासाठी केलेल्या संशोधनाबद्दल काय सांगशील?

आमच्या लेखकाने यावर चार वर्षे संशोधन केलं आणि त्यानंतर मी निखिलला यामध्ये समतोल आणण्यास सांगितले. आम्ही ५१ दिवसांत या चित्रपटाचे चित्रिकरण पुर्ण केलं. मी ते पोलिस अधिकारी, त्यांची बायको आणि कुटुंबियांना भेटलो आहे. त्यांच्या पत्नीने मला सांगितले की, ते पाच मिनिटांपेक्षा जास्त बोलत नाहीत. आम्ही ते समजून घेण्याचा प्रयत्न केला. त्यांचं त्यांच्या पत्नीवर प्रचंड प्रेम आहे. त्यांच्या आयुष्याचं द्विभाजन झालं आहे. ते अतिशय गौरवशाली अधिकारी होतेत त्यादरम्यान त्यांच्यावर आरोप झाले, त्यामुळे या प्रकरणात आपला काय दोष, असं ते विचारयचे. सध्या ते दिल्ली पोलीस सेलचे डीसीपी आहेत. त्यांच्या जीवाला सतत धोका असून, त्यांना झेड सुरक्षा देण्यात आली आहे. त्यांना अलीकडेच दुखापत झाली होती आणि ते घरी सुखरुप येतील का, याची आपल्याला खात्री वाटत नसल्याचं त्यांच्या पत्नी सांगतात. कोणीतरी या गोष्टीचं कौतुक केलं पाहीजे. त्यांची पत्नी एबीपी न्यूज चॅनेलसाठी काम करतात आणि त्यांच्या मुलांना या सगळ्यापासून दूर ठेवण्यात आलं असल्याची माहिती त्यांच्या पत्नीनं दिली.   

तुझ्या फीटनेसचे रहस्य काय आहे?

मी सिगरेट ओढत नाही, दारु पित नाही. तळलेल्या आणि गोड पदार्थांपासून दूर राहतो. लोक म्हणतात की, माझे टेस्ट बडस् मरुन जात आहेत. मला वाटतं जर तुम्हाला या आरोग्याला अपाय करणारया गोष्टी खाण्याची इच्छा होत असेल, तर तुमचे मन कमकुवत आहे. यापैकी मला कोणी काही देऊ केलं तर मी त्यांना माझा शत्रू म्हणतो. त्यांना माझं चांगलं झालेलं नको आहे. जेंव्हा तुम्ही आजारी असता, तेंव्हा फक्त कुटुंबच तुमच्याजवळ येतं. आरोग्य हीच खरी संपत्ती आहे आणि तुम्ही स्वतःचे रक्षण करायला पाहीजे

आगामी चित्रपट कोणते आहेत?

मी मुंबई सागा सुरु करत आहे आणि नंतर मी ऍटॅक विथ लक्षची निर्मीती करतोय, जो ऍक्शन चित्रपट आहे आणि सत्यमेव जयते २ हा आणखी एक चित्रपट रांगेत आहे. मी सध्या माझ्या कामाचा पूर्वी कधीही घेतला नसेल एवढा आनंद घेत आहे, आणि मला त्याचा अभिमान आहे. मी पुन्हा एकदा बॉबी ग्रेवाल आणि निखिल अडवाणीबरोबर काम करत आहे. आम्ही एकत्र सहा चित्रपट करत आहोत. माझ्या मते जेए एंटरटेंनमेंटमध्ये आम्ही असे चित्रपट करत आहोत जे करायला आम्हाला खरोखरच खूप आवडेल. मी पार्ट्यांना जात नाही आणि मी कुठल्याही कॅंपमध्येही नसतो आणि मला मित्रही नाहीत. मी माझे स्वतःचे काम करतो आणि मी बजेटशी तडजोड करत असलो, तरी मी ज्या कथा घेऊन येत आहे, त्याचा मला आनंद आहे. आमच्याबरोबर आता स्टुडीयो देखिल सहनिर्माता म्हणून काम करण्यास तयार आहेत.

पागलपंती हा चित्रपट सुध्द तु करत आहेस?

मला अनीस बज्मी हे दिग्दर्शक म्हणून खूप आवडतात आणि त्यांचे विनोदी चित्रपटही, हसवणे हि सगळ्यात अवघड शैली आहे. लोकांना हसवणं खूपच कठीण असतं. आम्ही नुकतंच त्याचं चित्रिकरण पूर्ण केलं आणि मला ते करताना खूप मजा आली.

उपराष्ट्रपतींनी बाटला हाऊस पाहिला तेव्हा त्यांची प्रतिक्रीया काय होती?

ते खूपच प्रभावित झाले आणि ते म्हणाले की मी तुमच्या दृष्टीकोनाचा आदर करतो.

- हर्षदा वेदपाठक

Monday, 19 August 2019

Khaiyamsab is no more

Mohammed Zahur Khayyam Hashmi was a noted music composer of the Hindi film industry and was best known for his compositions in films like Umrao Jaan and Kabhi Kabhi.

He was honoured with the National Film Award for his work in Umrao Jaan. He also won a Filmfare Award for Umrao Jaan and Kabhi Kabhi. He was bestowed with the Sangeet Natak Akademi Award in 2007.

The Government of India honoured him with Padma Bhushan in 2011.

The composer had been hospitalised due to lung infection on July 28 after he collapsed in his house. The 92-year-old artiste was admitted to Sujoy Hospital in Juhu.


संगीतकार खय्याम यांना मुख्यमंत्र्यांची श्रद्धांजली

संगीतकार खय्याम यांच्या निधनाने अतिशय तरल आणि संगीत देणारा महान कलावंत आपण गमावला आहे , अशा शब्दात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी श्रद्धांजली अर्पण केली आहे.

मुख्यमंत्री आपल्या शोकसंदेशात म्हणतात, खय्याम यांच्या अभिजात रचनांनी रसिकांच्या हृदयाला स्पर्श केला आहे. अनेक चिरंतन अजरामर  ठरणाऱ्या रचनांमुळे खय्याम रसिकांच्या सदैव स्मरणात  राहतील. उमरावजान,  कभी कभी, आखरी खत, रझिया सुलतान, नुरी अशा चित्रपटातील त्यांची काही गीते कालातीत आहेत. मिर्झा गालिब, मजरूह सुलतानपुरी, साहिर लुधियानवी, निदा फाजली अशा श्रेष्ठ प्रतिभावंतांच्या  महान रचनांना खय्याम यांनी पुरेपूर न्याय दिला. एक कलावंत म्हणून खय्याम जेवढे महान होते तितकेच ते एक माणूस म्हणूनही श्रेष्ठ होते. पद्मभूषण, फिल्मफेअर अनेक पुरस्कारांनी त्यांचा सार्थ गौरव झाला होता. अलिकडेच हृदयनाथ मंगेशकर यांच्या कार्यक्रमात त्यांची भेट झाली होती.  त्यावेळी प्रशंसापर आशीर्वाद लाभले होते. ही भेट अखेरची ठरल्याचे मला मनस्वी दुःख आहे.


Monday, 5 August 2019

Article 370 आर्टिकल ३७०

जम्मू काश्मिर आणि लडाखला केंद्रशासित प्रदेशाचा दर्जा, केंद्रशासित प्रदेश म्हणजे काय?

केंद्र शासनाच्या थेट नियंत्रणाखाली असलेला भूप्रदेश म्हणजे केंद्रशासित प्रदेश. भारत देशामध्ये 29 राज्य आणि सात केंद्रशासित प्रदेश (Union Territory) आहेत. हे प्रदेश कोणत्याही राज्याचा भाग नसून त्यांचे प्रशासन थेट केंद्र सरकारद्वारे केले जाते. भारताचे राष्ट्रपती प्रत्येक केंद्रशासित प्रदेशासाठी प्रचालकाची नेमणूक करतात.

मोदी सरकारने मास्टरस्ट्रोक मारत जम्मू काश्मीर (Jammu and Kashmir) मधील कलम 370 (Article 370) हटवण्याचा प्रस्ताव ठेवला आहे. गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) यांनी जम्मू काश्मीरमधील कलम 370 हटवण्याची शिफारस राज्यसभेत केली. इतकंच नाही तर राज्याच्या पुनर्रचनेचाही प्रस्ताव अमित शाह यांनी मांडला. यानुसार जम्मू काश्मीर आणि लडाख केंद्रशासित प्रदेश जाहीर करण्यात आलेला आहे.

भारतात आतापर्यंत सात केद्रशासित प्रदेश होते. कलम 370 हटवून जम्मू काश्मिर आणि लडाखची भर या यादीत पडणार आहे.

केंद्रशासित प्रदेश कोणकोणते?

अंदमान आणि निकोबार

चंदीगड

दमण आणि दीव

दादरा आणि नगर हवेली

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी प्रदेश

पुदुच्चेरी

लक्षद्वीप

जम्मू काश्मीर

लडाख

स्वातंत्र्य काळात काही भूभाग भारताचा भाग नव्हते, किंवा राज्यामध्ये रुपांतरित करण्याइतपत मोठे नव्हते. आर्थिकदृष्टया कमकुवत आणि राजनैतिकदृष्ट्या अस्थिर असलेले हे भूप्रदेश केंद्र सरकारच्या सहकार्याविना प्रशासन चालवू शकणार नाहीत, असं निदर्शनास आलं.
1956 साली सातवी घटनादुरुस्ती आणि राज्य पुनर्रचना अधिनियम याद्वारे केंद्रशासित प्रदेशांची निर्मिती करण्यात
आली.

पोर्तुगीजांकडून गोवा, दमण आणि दीव, दादरा आणि नगर हवेली; तसेच फ्रेंचांकडून मिळालेला पुदुच्चेरी हा भूप्रदेश केंद्रशासित प्रदेश म्हणून नियुक्त करण्यात आला.

केंद्रशासित प्रदेशांची निर्मिती कधी?

अंदमान आणि निकोबार (1956)
दिल्ली (1956)
लक्षद्वीप (1956)
दादरा आणि नगर हवेली (1961)
दमण आणि दीव (1962)
पुदुच्चेरी (1962)
चंदीगड (1966)

केंद्रशासित प्रदेश निर्मितीची कारणं काय?

राजकीय आणि प्रशासकीय दृष्टीकोन – दिल्ली, चंदीगड
सांस्कृतिक वेगळेपण – पुदुच्चेरी, दमण आणि दीव, दादरा आणि नगर हवेली
व्यूहनीतीचा दृष्टीकोन – अंदमान आणि निकोबार, लक्ष्यद्वीप

कलम 370 काय आहे?

भारतीय राज्यघटनेच्या कलम 370 नुसार जम्मू काश्मीरला सार्वभौम राज्य म्हणून विशेष दर्जा देण्यात आला आहे. भारतीय संविधाना अंतर्गत जम्मू काश्मीरचं स्वतंत्र संविधान आहे. या कलमानुसार भारताचा नागरिक काश्मीरमध्ये स्थायिक होऊ शकत नाही. तसंच दुसऱ्या राज्यातील नागरिक इथे संपत्ती खरेदी करु शकत नाहीत. एवढंच नाही तर जम्मू-काश्मीरमधील महिलेने इतर राज्यातील मुलाशी लग्न केलं असेल, तर त्यालाही इथे जमीन खरेदी करता येणार नाही.

कलम 370 हटवल्याने काय होईल?

जम्मू काश्मीरचा स्वायत्त राज्याचा दर्जा राहणार नाही.
एखादा नवा कायदा लागू करायला राज्य सरकारच्या परवानगीची आवश्यकता नसेल.
त्यामुळे राज्याच्या कायद्यात केंद्र सरकार हस्तक्षेप करु शकेल.
370 कलम हटवल्याने संपत्ती खरेदीचा आणि गुंतवणुकीचा मार्ग मोकळा होईल.
370 कलमांतर्गत 35 A मुळे मिळालेले अधिकारही निघून जातील.

कलम 35A काय आहे?

14 मे 1954 रोजी भारताच्या राष्ट्रपतींच्या एका आदेशानुसार कलम 370 अंतर्गत कलम 35A जोडण्यात आलं. कलम 370 मुळे जम्मू-काश्मीरला आधीच विशेष राज्याचा दर्जा प्राप्त होता. पण कलम 35A जोडल्यामुळे जम्मू-काश्मीरच्या राज्य सरकारला स्वतःचं संविधान आणि काही विशेष कायदे तयार करण्याचे अधिकार मिळाले.

भारतीय राज्यघटनेतील कलम 35-A कलम 370 शी संबंधित आहे. ज्याअंतर्गत काश्मिरींच्या अधिकारांची तरतूद करण्यात आली आहे.  जम्मू काश्मीरमधून कलम 35A रद्द केल्यास त्या राज्याला देण्यात आलेला विशेष राज्याचा दर्जा संपेल. जम्मू काश्मीर विधानसभेला स्थानिक नागरिक परिभाषा ठरवण्याचा अधिकार या कलम 35 ए मुळे मिळतो. त्यामुळे स्थानिक नागरिकांना काही विशेष अधिकार मिळतात. राज्यात मालमत्ता खरेदी करणे, सरकारी नोकऱ्या, स्कॉलरशिपसह अन्य योजना मिळतात.
(Copied)

Sunday, 21 July 2019

Sonakshi Sinha Defines Versatility With The Most Interesting Line-Up of Films


We all know how much everyone has loved the trailer of ‘Khandaani Shafakhana’which is a story of ‘Baby Bedi’ a.k.a Sonakshi Sinha; where she is urging people to talk about sex in order to save her ancestral sex-clinic. The trailer is extremely hilarious and also, it’s one of its kind as, this is the first time where in a movie based on a topic like sex-education, a female lead has taken the responsibility of making people talk about it by saying, #BaatTohKaro!

We must say, when it comes to choosing bold characters, there’s no one who can do it like our beloved Sona! Ever since she made her debut in Dabangg, she has been experimental with her roles. Even though now Dabangg has become a huge franchise, Sonakshi’s character graph in the film changed in both the parts. Be it Akira, Holiday or Force 2, Sonakshi Sinha loves to play a strong female lead who likes to live life on her own terms and is a trained fighter.

While we are talking about strong female characters, Sonakshi dared to go off-beat as well, because in Noor and Happy Phirr Bhag Jayegi, her roles were a bit on the goofy side, but certainly made sure that they made an impact. When it comes to playing content oriented cinema with complex characters, Sona had us head over heels in love with her in films like Lootera.

She didn’t even shy away from playing the villain in Ittefaq and now she’s all set to entertain us with the most interesting line-up of her films in the upcoming couple of years. Apart from ‘Khandaani Shafakhana’, Sona is returning as the lovely Rajjo in Dabangg 3. Along with that, she is also playing a lead role in a multi-starrer ensemble cast film, Mission Mangal, where she becomes an Astronaut on-screen! Sona is also starring in Bhuj, alongside Ajay Devgn which is based on the condition of Bhuj, Rajasthan during the 1971 Indo-Pak war.

What is it that this versatile woman can’t do? We just hope that she keeps on entertaining us with her interesting choice of characters for many, many years to come!

Tuesday, 7 May 2019

Mentel Hai Kya been postponed

To whomsoever it may concern,

A lot is being reported about Mental Hai Kya clashing with another film at the box office on July 26. The shift in the release date is a decision taken after the recommendations from the distributors, trade analysts and top research team, keeping in mind the releases a week before and after this date.
We have been advised to shift the release of our movie to July 26, purely for the business prospects.

On knowing, that there is already a movie scheduled for a release on that date, we did it all in our purview to ensure that there will be no mud slinging and it will be dignified release. We stand by assuring that to all other parties.

This is a call taken by Ekta Kapoor’s Balaji Motion Pictures considering better prospects for the movie at the box office and no other parties were involved.

Balaji Telefilms condemn the reports being circulated and stand by that Mental Hai Kya releasing on 26th July is purely a business decision made by Ekta Kapoor’s Balaji Telefilms.

Friday, 8 February 2019

१५ मार्च पासून महाराष्ट्रात लागू होणार छत्रपती शासन


पोस्टर रीलीज करताना मा. खा. उदयनराजे भोसले यांच्या समवेत चित्रपटाचे  लेखक_दिग्दर्शक खुशाल म्हेत्रे व सहनिर्माते अमर पवार


१५ मार्च पासून महाराष्ट्रात लागू होणार 'छत्रपती शासन' 

प्रबोधन फिल्म्स प्रस्तुत ''छत्रपती शासन'' सिनेमा येत्या १५ मार्च २०१९ रोजी संपूर्ण महाराष्ट्रात प्रदर्शित होत आहे. धर्म, जाती, प्रदेशाच्या नावाखाली स्वतःसह दुसऱ्याच्याही आयुष्याची राखरांगोळी  करणाऱ्या तरुणांच्या डोळ्यांत झणझणीत अंजन घालून त्यांना श्री छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या खऱ्या विचारांची ओळख करून देण्याचा प्रयत्न म्हणजे "छत्रपती शासन" चित्रपट होय.  भविष्यातील खरी ताकद असलेल्या तरुण पिढीचा डळमळीत होणारा आत्मविश्वास पुन्हा मिळवून देणारा परिपूर्ण फॅमिली एंटरटेनमेंट असलेला हा सिनेमा आहे. महाराजांचे विचार हे आजच्या काळात प्रत्यक्षात आचरणात आणण्यासाठी साकारण्यात आलेला प्रयत्न म्हणजे "छत्रपती शासन". या सिनेमाचा पोस्टर लॉँच सोहळा छत्रपती शिवाजी महाराजांचे वंशज मा.खा.श्री. उदयनराजे भोसले यांच्या हस्ते नुकताच पार पडला. उत्कर्ष कुदळे, प्रियांका कागले आणि खुशाल म्हेत्रे यांची निर्मिती असलेल्या या सिनेमाचे दिग्दर्शन खुशाल म्हेत्रे यांनी स्वतः केलं असून कथा, संवाद देखील त्यांचेच आहेत. प्रथेप्रमाणे एखाद्या सिनेमाचा मुहूर्त सिनेक्षेत्रातील नामांकित मंडळी, राजकारणी अथवा इतर मान्यवरांच्या हस्ते केला जातो. मात्र या सिनेमाच्या टीमने अशा पारंपरिक प्रथेला बगल देत एक वेगळाच पायंडा पाडला आहे. ''छत्रपती शासन'' सिनेमाच्या चित्रीकरणाचा मुहूर्त पहिल्यांदाच स्पॉट दादा योगेश मर्कड यांच्या हस्ते नारळ वाढवून करण्यात आला होता. अभिनेता  मकरंद देशपांडे, किशोर कदम, संतोष जुवेकर, अभिजीत चव्हाण, प्रशांत मोहिते, अनिल नगरकर यांच्या सिनेमात प्रमुख भूमिका असून सायली काळे, धनश्री यादव, किरण कोरे, सायली पराडकर, रामचंद्र धुमाळ, विष्णू केदार, राहूल बेलापूरकर, पराग शहा, प्रथमेश जोशी, श्रेयसचंद्र गायकवाड, अभय मिश्रा, मिलिंद जाधव यांचा अभिनय देखील सिनेमात पाहायला मिळणार आहे. गीतकार  डॉ. विनायक पवार, नंदेश उमप, दीपक गायकवाड, राजन सरवदे यांच्या लेखणीतून सजलेल्या गाण्यांना नंदेश उमप, रोहित नागभिडे, सचिन अवघडे, अभिजित जाधव, राजन सरवदे यांनी संगीत दिलं आहे. गायक नंदेश उमप, उर्मिला धनगर, जान्हवी प्रभू अरोरा, अभिजित जाधव, राजन सरवदे या गायकांच्या विविधांगी आवाजांचा स्वरसाज सिनेमातील गाण्यांना चढला आहे. बाल कलाकार श्रीशा म्हेत्रे, राजवर्धन दुसाने, रोमित भुजबळ आणि रेवा जैन यांच्या खुमासदार अभिनयाची झलक यातून पाहायला मिळणार आहे. या चित्रपटाच्या निम्मिताने १५ मार्च पासून महाराष्ट्रात 'छत्रपती शासन' लागू होणार आहे असे म्हटल्यास वावगे ठरणार नाही.